मोदी क्यों नहीं माँग रहे नोटबन्दी, जीएसटी और ‘अच्छे दिनों’ पर वोट?
मोदी क्यों नहीं माँग रहे नोटबन्दी, जीएसटी और ‘अच्छे दिनों’ पर वोट?
नरेन्द्र मोदी अम्बानी-अडानी के पैसों के बूते हेलीकॉप्टरों में घूमघूमकर सभा करनी शुरू कर चुके हैं। इन सभाओं में पैसे दे-देकर भीड़ जुटाई जा रही है, फिर भी आधी कुर्सियाँ ख़ाली ही रह जा रही हैं। यही कारण है कि मोदी ज़्यादा चीख़-चिल्ला रहे हैं! चुनाव भारत का है, मगर वोट पाकिस्तान के नाम पर माँग रहे हैं! हिन्दू-मुसलमान, मन्दिर-मस्जिद, आदि सब पर बात हो रही है, लेकिन ‘अच्छे दिनों’ की बात नहीं हो रही है। यह शब्द मोदी को बुरे सपने की तरह सता रहा है।
यही कारण है कि मोदी अपने सरकार की किसी वास्तविक उपलब्धि की बात नहीं कर रहे। बालाकोट हमले की बातें की जा रही है, हालाँकि उसको लेकर भी मोदी सरकार झूठ बोल रही है। अमेरिका ने तो यह भी बता दिया कि भारत ने पाकिस्तान का कोई एफ़-16 लड़ाकू विमान नहीं गिराया है। लेकिन मोदी सरकार बेशर्मी से झूठ बोले जा रही है। वैसे भी यह भारत का पहला प्रधानमन्त्री है जो बिना किसी लज्जा के इतना चीख़-चीख़ कर झूठ बोलता है!
लेकिन सबसे बड़ी बात है कि जिस नोटबन्दी के बारे में दावा किया गया था कि वह काला धन समाप्त कर देगा, उसके बारे में मोदी एक शब्द नहीं बोल रहे। जिस जीएसटी के बारे में कर प्रणाली को न्यायपूर्ण बनाने का दावा किया गया था, उसके बारे में भी मोदी के मुँह से एक शब्द नहीं निकल रहा। न ही 15 लाख रुपये देने, 2 करोड़ रोज़गार प्रति वर्ष पैदा करने आदि के मोदी के 2014 के वायदों पर मोदी कुछ बोल रहे हैं! क्या इसी से पता नहीं चलता कि मोदी सरकार सभी मामलों में फेल रही है और अब आम मेहनतकश लोगों को धर्म और अन्धराष्ट्रवाद की अफ़ीम सुंघाकर बेवकूफ़ बना रही है? दोस्तो! इन फ़ासीवादियों के झाँसे में न आएं और चुनावों में इनका पूर्ण बहिष्कार करें। ये मज़दूरों-मेहनतकशों के सबसे बड़े दुश्मन हैं। हमें इसे हराना ही होगा! यह हमारे अस्तित्व की शर्त बन चुका है।
