बवाना के मज़दूरों के जीवन की परिस्थिति के लिए जिम्मेदार हैं सभी पूँजीवादी चुनावी पार्टियाँ! मज़दूर पार्टी ही एकमात्र विकल्प है!

बवाना के मज़दूरों के जीवन की परिस्थिति के लिए जिम्मेदार हैं सभी पूँजीवादी चुनावी पार्टियाँ! मज़दूर पार्टी ही एकमात्र विकल्प है!

बवाना औद्योगिक क्षेत्र में 2004 में सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर पर डीएसआईआईडीसी के मातहत लघु उद्योगों को बसाया गया। इसके अलावा यहाँ बड़ी कम्पनियाँ प्रगति पॉवर प्लान्ट, डीएमएसडब्लू और सैल जैसी कम्पनियाँ भी हैं। बवाना में 16350 प्लॉट में 12000 फैक्टरियाँ हैं और इनमें हज़ारों मज़दूर काम करते हैं। अधिकतम फ़ैक्टरियों में मज़दूर 5000-6000 रुपये में काम करते हैं। ये कम्पनियाँ मज़दूरों को जमकर लूटती हैं। यह बात हम मज़दूरों को समझनी होगी कि मज़दूरों की सबसे बर्बर लूट अक्सर छोटे फैक्टरी मालिकों द्वारा होती है। बवाना में कईं छोटे मालिक फैक्टरी किराए पर लेकर चला रहे हैं जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार गै़रकानूनी है। किराए पर चल रही फैक्टरियों के बारे में अधिकतर सरकारी विभागों को कोई जानकारी नहीं है। यही कारण है कि ये फैक्टरियाँ किसी श्रम कानून का पालन नहीं करती हैं क्योंकि सरकार की नज़र में ये अस्तित्व में ही नहीं है। यही कारण है कि ये फैक्टरियाँ किसी भी प्रकार के अग्निशमन व सुरक्षा के नियमों का पालन नहीं करती हैं। पिछले साल बवाना की फैक्टरियों में आग लगने पर जब बवाना औद्योगिक क्षेत्र मज़दूर यूनियन के नेतृत्व में दिल्ली सरकार का घेराव किया गया तो डीएसआईआईडीसी ने इन फैक्टरी मालिकों को नोटिस दिया कि इन फैक्टरियों में कानूनों का पालन किया जाए। अब चूँकि ये छोटे फैक्टरी मालिक ही भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को सबसे अधिक चन्दा देते हैं इसलिए कम्पनी का मालिकाना फ्रीहोल्ड पर लेने के लिए, जिससे वे डीएसआईआईडीसी की कार्यवाही से बच सकें, इन्होंने आम आदमी पार्टी के मन्त्री से मुलाकात की। आम आदमी पार्टी ने इन मालिकों को इस कार्यवाही से बचाने के लिए विधानसभा से कानून बनाने की बात कही है। ये छोटे मालिक 2018 में ही भाजपा के सांसद उदित राज से भी मिले जिन्होंने कहा कि बवाना के मालिकों ने 1994 से बहुत मेहनत कर ये फैक्टरियाँ खड़ी की हैं! उदित राज ने भी बवाना के फैक्टरी मालिकों को ज़मीन फ्रीहोल्ड पर दिलवाने की माँग की। परन्तु भाजपा और आम आदमी पार्टी इन फैक्टरियों में मज़दूरों के हक़-अधिकारों पर कुछ भी न बोले। क्योंकि मज़दूरों की लूट से बवाना के मालिक जो मुनाफा पीटते हैं उससे ही ये भाजपा, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को चन्दा देते हैं। इसलिए ये मज़दूरों की मौत पर चुप ही रहेंगे। ये ठेकेदारों द्वारा पैसा मारे जाने पर चुप ही रहेंगे। ये हमारी लाशों पर मुनाफ़ा पीटने वाले, हमारी हड्डियों के चूरे को बाज़ार में बेचने वाले छोटे फैक्टरी मालिकों के ही प्रतिनिधि हैं। इस बार लोकसभा चुनाव में हम अगर इन पूँजीवादी पार्टियों को वोट देंगे तो अपनी मौत के सौदागरों को वोट देंगे। इस बार हम केवल और केवल मज़दूरों की अपनी पार्टी भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI) की उम्मीदवार अदिति को उत्तर-पश्चिमी दिल्ली की लोकसभा सीट से विजयी बनाएँ। भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी पिछले 15 सालों से मज़दूरों को संगठित करने वाले मज़दूर कार्यकर्ताओं और मज़दूरों ने बनायी है जो बवाना में पिछले साल आग लगने से हुई मौतों के खिलापफ़ मज़दूरों को संगठित कर रहे हैं। बवाना में मज़दूरों की क्रान्तिकारी यूनियन बवाना औद्योगिक क्षेत्र मज़दूर यूनियन भी भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI) की उम्मीदवार अदिति को अपना समर्थन दे रही है।