नयी शिक्षा नीति 2020: शिक्षा का कॉरपोरेटाइजेशन, भगवाकरण करने की परियोजना

छात्रों-युवाओं और बुद्धिजीवियों के तमाम विरोध को दरकिनार करते हुए दिनांक 29 जुलाई के दिन ‘नयी शिक्षा नीति 2020’ को

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दिल्ली में केजरीवाल ने दिया फैक्टरी मालिकों को तोहफा

एक तरफ जहाँ देश स्तर पर मोदी सरकार मजदूर विरोधी नीतियों को नंगे तौर पर लागू कर टाटा-बिड़ला-अम्बानी सरीखे पूँजीपतियों

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आवास का अधिकार है जीने का अधिकार! झुग्गी तोड़ने से पहले पक्के आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करो ! संघर्ष से एक कदम पीछे हटी है सरकार पर खतरा अभी टला नहीं है!!

सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के कारण दिल्ली भर में लाखों लोगों के सर पर अचानक से आवास का संकट

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जी हां, प्रधानमन्‍त्री महोदय! हम समृद्धि पैदा करने वाले लोगों का सम्‍मान करते हैं! लेकिन ये आपके पूंजीपति मित्र नहीं हैं!

आइये देखते हैं कि हमारे प्‍यारे अम्‍बानी, अडानी, टाटा, बिड़ला, हिन्‍दुजा, गोयनका वगैरह कितनी हाड़-तोड़ मेहनत करके समाज में समृद्धि का सृजन करते हैं, जो अब तक प्रधानमन्‍त्री महोदय के अनुसार बंटकर हमें मिलती रही थी! अरे, तभी तो हम ग़रीब लोग सुबह-शाम अण्‍डे-दूध, मुर्गा, पनीर चांपते हैं, अपने बच्‍चों को विलायत पढ़ने भेजते हैं और आरामदेह मकान में रहते हैं! बस यही है कि बाद में हम भूल जाते हैं! ख़ैर! तो देखते हैं कि ये मालिक और ठेकेदार लोग कैसे कोल्‍हू के बैल के समान मेहनत करके हमारे लिए समृद्धि पैदा करते हैं।

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मेहनतकश की आवाज-2, 14 अप्रैल 2019

  • मेहनतकश जनता अपना स्वतन्त्र विकल्प खड़ा करके ही फासीवादी मोदी सरकार को हरा सकती है!
  • जो ठेका प्रथा पूर्ण रूप से समाप्त करने की बात न करे, हर उस पार्टी का पूर्ण बहिष्कार करो!
  • क्या मोदी मज़बूत नेता है?
  • सेना को “मोदी सेना” कहना आम सैनिकों का अपमान
  • मोदी क्यों नहीं माँग रहे नोटबन्दी, जीएसटी और ‘अच्छे दिनों’ पर वोट?
  • मोदी सरकार के दौर में न्यायपालिका की हालत
  • यह चुनाव आयोग है या भाजपा का चुनाव विभाग?
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    भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI) और क्रान्तिकारी मनरेगा मज़दूर यूनियन के नेतृत्व में मनरेगा मजदूरों ने काम के अधिकार और भ्रष्टाचार के खि़लाफ़ आवाज़ उठायी

    आज हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे देश में जहाँ-जहाँ मनरेगा का काम चलता है वहाँ सभी जगह ऊपर से नीचे तक प्रशासन के भ्रष्टाचार के केस हर दिन उजागर हो रहे हैं। वैसे तो भाजपा की खट्टर सरकार अपने आप को “भ्रष्टाचार मुक्त” सरकार बताती है लेकिन जो भ्रष्टाचार मनरेगा में कांग्रेस की सरकार के समय से चला आ रहा था वह आज भी भाजपा सरकार में ज्यों का त्यों बना हुआ है, बल्कि पहले से भी बढ़ गया है। सत्ता में आने से पहले भाजपा सरकार ने मज़दूरों से बड़े-बड़े वायदे किए थे जिनमे “अच्छे दिनों” का वायदा भी शामिल था लेकिन जैसे ही भाजपा की मोदी सरकार सत्ता में आयी वैसे ही अपने सभी वायदों से मुखर गयी। 

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    दिल्ली स्टेट आँगनवाड़ी वर्कर्स एण्ड हेल्पर्स यूनियन ने दिया मज़दूर पार्टी (RWPI) को समर्थन

    यूनियन की कार्यकारिणी की सदस्य मनीषा ने कहा कि न सिर्फ मज़दूर पार्टी हमारी समस्त यूनियन माँगों को स्वीकार करती है और उसके लिए संघर्षरत है, बल्कि वह एक ऐसा घोषणापत्र और एजेण्डा लेकर चुनावों में आयी है, जिसे सच्चे मायने में मज़दूरों, स्त्रियों और युवाओं का एजेण्डा कहा जा सकता है। यूनियन कार्यकारिणी की सदस्य पूनम ने कहा कि इस पार्टी पर भरोसा करने का कारण यह है कि इस पार्टी को स्वयं मज़दूरों, आँगनवाड़ीकर्मियों, बेरोज़गार युवाओं और कर्मचारियों ने बनाया है। दूसरी वजह यह है कि यह पार्टी अम्बानी, अडानी, टाटा, बिड़ला जैसे पूँजीपतियों, ठेकेदारों और दलालों से चन्दा नहीं लेती बल्कि स्वयं मज़दूर वर्ग और आम मेहनतकश आबादी के बीच से अपने संसाधनों को जुटाती है।

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    क्या आपको पता है?

    मौजूदा संसद में करीब 33 प्रतिशत सांसद ऐसे हैं, जिन पर हत्या, बलात्कार, दंगा करवाने, घपले करने आदि जैसे मुकदमे दर्ज़ हैं! इनमें से सबसे ज़्यादा आरोपी सांसद अपने चाल-चेहरा-चरित्र और भारतीय संस्कृति की दुहाई देने वाली धर्मध्वजाधारी भारतीय जनता पार्टी है। लेकिन अन्य पार्टियों की स्थिति भी ऐसी ही है। ये सभी करोड़पति और अरबपति तक हैं। क्या आप इतने भोले और नादान हैं कि आपको लगता है कि ऐसे लोग आपकी नुमाइन्दगी करेंगे?

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    यूनियन आमसभा में दिल्ली घरेलू कामगार यूनियन ने लिया फैसला – भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI) ही हमारा पक्ष है! 

    दिल्ली में इस समय लगभग 5 लाख घरेलू कामगार हैं। हमारे लिए अभी तक कोई कानून नहीं है। हम गुमनामी में काम करते हैं। इसी बात का फ़ायदा मालिकों को मिलता है। हमारे लिए किसी भी पार्टी की सरकार ने काम नहीं किया है। हॉं, बातें सबने की हैं। लेकिन हमें सिर्फ बातें नहीं ठोस-ठोस काम चाहिए। अभी तक किसी चुनावबाज पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में हमारे बारे में एक लफ्ज़ नहीं कहा था।

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