मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया में मज़दूरों के नारकीय हालात और मज़दूर पार्टी का संकल्प

मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया में मज़दूरों के नारकीय हालात और मज़दूर पार्टी का संकल्प

मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया जहाँ हर तरह की फैक्टरियाँ चलती हैं, जैसे कि जूता, प्लास्टिक, गत्ता, कैमिकल आदि। यहाँ हर फैक्टरी में 12-12 घण्टे की 2 शिफ्ट में काम होता है। सभी फैक्टरियों में औसतन 30-40 मज़दूर काम करते हैं। यहॉं अधिकतम आय 7000-8000 रुपये तक है। अधिकांश फैक्ट्री लिमिटेड कम्पनियाँ नहीं है परंतु हर फैक्ट्री पर लिमिटिड कम्पनी का झूठा बैनर लगा है। अगर आप औद्योगिक क्षेत्र में घूमें तो पाएँगे कि स्टील की फ़ैक्टरी में काम करने वाले मज़दूर खुले में काम करते हैं। उनके ऊपर छाँव तक की कोई व्यवस्था नही थी। कड़कती धूप और नीचे तपती लोहे की मशीन पर ये मज़दूर काम करते हैं। छुट्टी करने पर मालिक पैसे काट लेता है। RWPI के वालण्टियर को इलाके में काम में लगे एक दिहाड़ी मज़दूर ने बताया कि उनको कभी 350 तो कभी 250 रुपये तक दिहाड़ी मिलती है। लेकिन ये पक्का नहीं है कि काम मिलेगा या नही। बहुत मुश्किल से घर का काम चलता है। RWPI के वालण्टियरों ने चुनाव प्रचार करते हुए मज़दूरों से बात करने के लिए कई फैक्टरियों में अन्दर जाने की कोशिश की लेकिन वे कुछ ही में अन्दर जा पाए।

एक फैक्ट्री के बाहर जॉब का इश्तहार देखकर RWPI के वालण्टियर काम लेने के बहाने अन्दर गए। अन्दर लोहे का काम हो रहा था जिनमें लोहे के रैक बन रहे थे। वहाँ काम करने के लिए पर्याप्त रोशनी तक की सुविधा नहीं थी। उसके बाद मालिक से मुलाकात पर पता चला कि 8 घण्टे के महिलाओं को 5500 रुपये दिए जाते हैं। एक अन्य फैक्टरी में पैकिंग का काम कराया जाता था। काम देखने के बहाने पता चला कि फैक्टरी में हर जगह धूल व कैमिकल की गंध फैली हुई थी जिसमे सांस लेने में भी मुश्किल हो रही थी। वहाँ पर नीचे बनने वाले लोहे की रैक वगैरह पर पेंट करने का काम और टेप चिपकाने जैसा काम हो रहा था। यहाँ काम कर रहे मज़दूरों ने बताया कि यहाँ 12 घण्टे के काम का महिलाओं को 5500 तथा पुरुषों को 7500 रुपये तक वेतन मिलता है। हर जगह कैमरे लगा कर मज़दूरों पर निगरानी रखी जाती है। उनको फोन तक करने की इजाज़त नहीं होती। ये हालात आज सिर्फ मुंडका ही नहीं बल्कि दिल्ली के अन्य सभी औद्योगिक क्षेत्रों में काम कर रहे मज़दूरो के हैं।

RWPI का यह संकल्प है कि वह यदि दिल्ली में किसी भी सीट पर विजयी होती है, तो दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों में जारी मालिकों और ठेकेदारों की इस मनमानी को बन्द करवाया जायेगा और सभी श्रम कानूनों को लागू करवाया जायेगा और नियमित जाँच की व्यवस्था की जायेगी।