कांग्रेस किसकी पार्टी है?

पूँजीपतियों की पार्टियों को जानो-2
कांग्रेस किसकी पार्टी है?

# कांग्रेस पार्टी देश के बड़े पूँजीपतियों की सबसे पुरानी पार्टी है।

# कांग्रेस को 2017-18 में इन पूँजीपतियों से लगभग 200 करोड़ रुपये का चन्दा मिला है।

# कांग्रेस ही वह पार्टी है जिसने ठेकेदारी, निजीकरण, उदारीकरण की नीतियों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की शुरुआत 1991 में नयी आर्थिक नीतियों के साथ की थी।

# कांग्रेस ने ही “समाजवाद” का जुमला उछालकर पहले बैंकों का राष्ट्रीकरण किया ताकि उससे अरबों रुपये का कर्ज़ टाटा, बिड़ला आदि को दिया जा सके। बाद में, कांग्रेस-नीत यूपीए सरकार ने इस कर्ज़ को माफ़ भी कर दिया। यानी जनता का पैसा पूँजीपतियों की जेबों में डाल दिया गया।

# आज़ादी के बाद हुए जीप घोटाले से लेकर 2-जी घोटाले तक इस पार्टी ने घोटाले करने का एक काला इतिहास लिखा था, हालाँकि भाजपा ने इसे अपने पाँच साल के राज्य में ही घपले-घोटाले में पीछे छोड़ दिया है।

# कांग्रेस के नेतृत्व में आज़ादी के बाद जो संविधान सभा बुलायी थी, वह देश की जनता ने नहीं बल्कि पूँजीपतियों और ज़मीन्दारों ने चुनी थी। इस प्रकार देश की राजनीतिक बुनियाद यानी संविधान बनाने में देश की जनता को कोई भूमिका नहीं दी गयी।

# देश में मज़दूरों का दमन करने में भी कांग्रेस पीछे नहीं रही है। बेलछी-बेलाडीला काण्ड, पंतनगर काण्ड से लेकर मारुति सुजुकी के मज़दूरों के दमन तक में, कांग्रेस ने पूरी वफ़ादारी से पूँजीपतियों की हित रक्षा में मज़दूरों-मेहनतकशों पर डण्डे-गोलियाँ चलाए हैं।

# कांग्रेस के मौजूदा चुनाव घोषणापत्र में तमाम लोकलुभावन वायदों के साथ यह भी कहा गया है कि पूँजीपतियों को उद्योग लगाने व चलाने की पूरी छूट दी जायेगी और उन्हें धंधा करने की हर सुविधा दी जायेगी। यानी, श्रम कानूनों सम्बन्धी सभी बाधाओं से मुक्ति का कांग्रेस ने पूँजीपति वर्ग से वायदा किया है। यही असली वायदा है! बाकी धोखा है!

भाजपा से तंग आकर पूँजीपतियों की दूसरी बड़ी पार्टी कांग्रेस को वोट देना हम मज़दूरों-मेहनतकशों के लिए कोई विकल्प नहीं है। हमारे पास आज अपनी राजनीतिक पार्टी RWPI मौजूद है। कल तक विकल्प नहीं था! हमारे पास इस या उस पूँजीवादी पार्टी को वोट देना मजबूरी था! मगर आज ऐसा नहीं है! इसलिए RWPI के उम्मीदवार को वोट दें! अपने स्वतन्त्र राजनीतिक स्वर को शक्तिशाली बनाएँ!