यूनियन आमसभा में दिल्ली घरेलू कामगार यूनियन ने लिया फैसला – भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI) ही हमारा पक्ष है! 

यूनियन आमसभा में दिल्ली घरेलू कामगार यूनियन ने लिया फैसला
भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI) ही हमारा पक्ष है! 

गत 6 अप्रैल को दिल्ली घरेलू कामगार यूनियन ने शाहबाद डेरी इलाके में अपनी आमसभा का आयोजन किया। आमसभा में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया कि 2019 के लोकसभा चुनावों में मेहनतकशों के स्वतंत्र पक्ष को यूनियन द्वारा समर्थन दिया जाएगा, जिसकी नुमाइन्दगी भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI) कर रही है। घरेलू कामगार यूनियन की बीना ने कहा कि देश की आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी मेहनतकश अवाम की जि़न्दगी में कोई बदलाव नहीं आया है बल्कि हालात और भी बदतर हुए हैं। अमीरी और ग़रीबी की खाई दिनो-रात चौड़ी होती गयी है। एक तरफ बड़ी-बड़ी कोठियाँ खड़ी हुई हैं तो दूसरी तरफ इन कोठियों को खड़ा करने वाली बड़ी आबादी को गन्दी झुग्गियों और कूड़े के ढेर पर ही जीना पड़ रहा है। अपनी सभी बुनियादी ज़रूरतों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार, आवास आदि से हम आज भी वंचित हैं। हर पाँच साल में हमने किसी न किसी पार्टी को चुना लेकिन इन्होंने हमारी बुनियादी ज़रूरतों के लिए कुछ काम नहीं किया। घरेलू कामगारों की ही बात करें तो हम लोग 10 घण्टे तक बड़ी-बड़ी कोठियों में काम करते हैं, कोठियों में रहने वाले लोगों की जि़न्दगियाँ आसान बनाते हैं। लेकिन बदले में हमें इतना भी नहीं मिलता कि वह एक इंसानी जि़न्दगी के लिए काफ़ी हो। ऊपर से रोज़-रोज़ जि़ल्लत और अपमान सहना हमारी जि़न्दगी का हिस्सा है। हर रोज़ हमें मालकिनों की मुँहदेखी और ठकुरसुहाती करनी पड़ती है।

ऐसा इसलिए है कि हमें मज़दूर नहीं समझा जाता। दिल्ली में इस समय लगभग 5 लाख घरेलू कामगार हैं। हमारे लिए अभी तक कोई कानून नहीं है। हम गुमनामी में काम करते हैं। इसी बात का फ़ायदा मालिकों को मिलता है। हमारे लिए किसी भी पार्टी की सरकार ने काम नहीं किया है। हॉं, बातें सबने की हैं। लेकिन हमें सिर्फ बातें नहीं ठोस-ठोस काम चाहिए। अभी तक किसी चुनावबाज पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में हमारे बारे में एक लफ्ज़ नहीं कहा था। RWPI  एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसने हमारी तक़लीफ़ों को समझा है और हमारी माँगों अपने चुनाव घोषणापत्र में शामिल किया है। काम की जगहों के अलावा हम जहाँ रहते हैं उस इलाके में में भी बुनियादी सुविधाएँ नहीं हैं। शाहबाद डेरी में पानी की समस्या एक बड़ी समस्या है जो गर्मी के दिनों में विकट बन जाती है। इसके अलावा डिस्पेंसरी, नालियों की साफ़-सफ़ाई, झुग्गियों की जगह पक्के मकान भी बड़े मुद्दे हैं जिनसे किसी भी नेता-मंत्री का कोई मतलब नहीं है। RWPI  इन मसलों पर भी एक स्पष्ट सोच और कार्यक्रम रखती है। इसलिए हमें लगता है कि अब अमीरों की नुमाइंदगी करने वाली चुनावबाज़ पार्टियों से उम्मीद लगाना खुद को धोखा देना है। 70 सालों से हम नागनाथ, साँपनाथ, गिरगिटमल में से किसी एक को चुनते आए हैं। लेकिन अब और नहीं! अब हम अपना उम्मीदवार, अपना पक्ष खुद खड़ा करेंगे। मेहनतकशों की क्रान्तिकारी पार्टी, भारत की क्रान्तिकारी मजदूर पार्टी ही हमारा विकल्प है।