जो ठेका प्रथा पूर्ण रूप से समाप्त करने की बात न करे, हर उस पार्टी का पूर्ण बहिष्कार करो!
जो ठेका प्रथा पूर्ण रूप से समाप्त करने की बात न करे, हर उस पार्टी का पूर्ण बहिष्कार करो!
मज़दूर भाइयो और बहनो! आज हमारे जीवन की बुरे हालात के सबसे प्रमुख कारणों में से है ठेका प्रथा। यह एक नयी गुलामी की व्यवस्था है। देश में कुल मज़दूर आबादी का 93 प्रतिशत ठेका, दिहाड़ी और कैजुअल मज़दूरों के रूप में काम करती है। यानी ठेका, दिहाड़ी और कैजुअल मज़दूरों की संख्या 40-50 करोड़ से कम नहीं है। इन 40-50 करोड़ मज़दूर भाइयों और बहनों के जीवन की हालत क्या है? दो जून की रोटी जुगाड़ करने में उनकी कमर टूट जाती है। बच्चों को अच्छी शिक्षा और चिकित्सा देना तो दूर की बात है। मुर्गी के दड़बों जैसी झुग्गी बस्तियों में हमारे बच्चों का बचपन बीमारी, कुपोषण और भुखमरी में बीतता है। इस ठेका प्रथा ने हमारे जीवन को नर्क बना दिया है।
भारत सरकार ने 1971 में ठेका मज़दूरी उन्मूलन व विनियमन कानून में वायदा तो यह किया था कि सभी नियमित किस्म के कामों पर से ठेका प्रथा को समाप्त कर दिया जायेगा। लेकिन 1971 के बाद से ठेका मज़दूरों की संख्या में दोगुनी-तिगुनी की बढ़ोत्तरी हुई है। कांग्रेस या भाजपा की सरकार हो, या फिर बसपा-सपा या वाम मोर्चा की या फिर आम आदमी पार्टी की, सभी ने इस सवाल पर हम मज़दूरों को धोखा दिया है। अब तो कोई पार्टी ठेका प्रथा के उन्मूलन की बात भी नहीं करती है। आम आदमी पार्टी आखि़री पार्टी थी जिसने यह वायदा किया था, लेकिन सत्ता में आते ही वह यह वायदा भूल गयी क्योंकि स्वयं आम आदमी पार्टी में तमाम विधायक व नेता अपनी फैक्टरियाँ चलवाते हैं! वे भला ठेका प्रथा को क्यों समाप्त करने लगे? नकली कम्युनिस्ट पार्टियाँ इसकी बात ज़रूर करती हैं, लेकिन जहाँ कहीं इनकी सरकार रही वहाँ भी इन्होंने ठेका प्रथा का उन्मूलन नहीं किया। राष्ट्रीय पैमाने पर भी इनके ट्रेड यूनियन फेडरेशन ठेका प्रथा के उन्मूलन के सवाल पर मज़दूरों को धोखा देते रहे हैं। हर आन्दोलन में इन्होंने प्रबन्धन, मालिकान या सरकार के साथ मिलीभगत कर आन्दोलन को बरबाद किया है। ऐसे में, माकपा, भाकपा व भाकपा (माले) लिबरेशन जैसे मज़दूर वर्ग के ग़द्दारों पर तो कतई भरोसा नहीं किया जा सकता है।
आखि़र इन सभी पार्टियों ने ठेका प्रथा के प्रश्न पर हम मज़दूरों और मेहनतकशों को धोखा क्यों दिया है? कारण यह है कि ठेका प्रथा पूँजीपति वर्ग को हम मज़दूरों से नंगे तौर पर गुलामी करने का मौका देती है। ये सभी पार्टियाँ छोटे, मँझोले या बड़े पूँजीपति वर्ग की नुमाइन्दगी करती हैं। ये सभी पूँजीवादी और निम्न-पूँजीवादी यानी टटपुँजिया चुनावबाज़ पार्टियाँ इन्हीं छोटे, मँझोले और बड़े मालिकों के चन्दे पर चलती हैं। ज़ाहिर है, कि वे इन्हीं मालिकों और ठेकेदारों की ही सेवा करेंगी। माकपा, भाकपा आदि भी हमेशा ही मज़दूरों से ज़्यादा छोटे मालिकों, व्यापारियों आदि के लिए टेसू बहाती रहती हैं। यहाँ उनकी पक्षधरता बिल्कुल साफ़ हो जाती है। ऐसे में, इन तमाम पूँजीवादी और टटपुँजिया चुनावबाज़ पार्टियों से यह उम्मीद करना कि वे ठेका प्रथा को समाप्त करेंगी, एक मूर्खतापूर्ण सपना होगा।
मज़दूर भाइयो और बहनो! जिस ठेका प्रथा ने हमारी जि़न्दगी को नर्क बना रखा है, उसे पूर्ण रूप से निजी और सरकारी दोनों ही संस्थानों से पूर्ण रूप से ख़त्म करने का वायदा आज कौन कर रहा है? सिर्फं एक पार्टी-भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी। इस पार्टी पर भरोसा क्यों किया जाय? इसलिए क्यों यह पार्टी पूरी तरह से मज़दूरों और मेहनतकशों के बीच से आने वाले सहयोग और चन्दे पर चलती है। दूसरी बात यह कि यह पार्टी स्वयं कारखाना मज़दूरों, आँगनवाड़ी कर्मियों, घरेलू कामगारों, कर्मचारियों, बेरोज़गारों नौजवानों और उनके राजनीतिक संगठनकर्ताओं ने बनायी है। इस पार्टी के काडर और लीडर इन्हीं के बीच से आते हैं। तीसरी बात, यह पार्टी सामूहिक निर्णय और सामूहिक नेतृत्व पर काम करती है और इसीलिए यह पार्टी भ्रष्ट और पूँजीवादी पथगामी नहीं हो सकती है। इन तीन कारणों से आप इस पार्टी और इसके कार्यक्रम पर पूरा भरोसा कर सकते हैं।
यदि आप ठेका प्रथा के खि़लाफ़ संघर्ष को आगे बढ़ाना चाहते हैं और इस नयी गुलामी से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो एक वर्ग के तौर पर एकजुट होकर भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी यानी RWPI को वोट दें। उसके वालण्टियर बनें। उसे अधिक से अधिक आर्थिक सहयोग करें। केवल यही पार्टी ठेका प्रथा को समाप्त करने की ताक़त रखती है। इसलिए जो मज़दूर ठेका प्रथा के विरुद्ध है, उसे इन लोकसभा चुनावों में जहाँ कहीं भी मज़दूर पार्टी का उम्मीदवार खड़ा है, उसे ही वोट देना है। मज़दूर पार्टी के उम्मीदवार दिल्ली में उत्तर पूर्वी दिल्ली और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली से खड़े हैं, हरियाणा में कुरुक्षेत्र और रोहतक से खड़े हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र में दो सीटों और उत्तर प्रदेश में एक सीट पर भी मज़दूर पार्टी के उम्मीदवार हैं। ये आपके वास्तविक प्रतिनिधि हैं। ये मज़दूर प्रतिनिधि हैं। केवल यही ठेका प्रथा के खि़लाफ़ वास्तव में लड़ सकते हैं और यदि कल मज़दूर पार्टी देश में सत्ता में आयी तो वही ठेका प्रथा को समाप्त भी कर सकती है। इसलिए आज ही अपना वोट मज़दूर पार्टी के उम्मीदवार के लिए पक्का कर लें, यदि आप उत्तर-पूर्वी दिल्ली, उत्तर-पश्चिमी दिल्ली, कुरुक्षेत्र या रोहतक के रहने वाले हैं। जहाँ अभी RWPI के उम्मीदवार नहीं हैं, वहाँ नोटा का बटन दबाकर अपना विरोध और असन्तोष दर्ज़ कराएँ और अपने शहर, गाँव या जिले में RWPI के वॉलण्टियर कोर बनाने के लिए आज ही से कार्य करें।
मज़दूर पार्टी को वोट दो
ठेका प्रथा को चोट दो!
