बवाना के मज़दूरों के जीवन की परिस्थिति के लिए जिम्मेदार हैं सभी पूँजीवादी चुनावी पार्टियाँ! मज़दूर पार्टी ही एकमात्र विकल्प है!
भाजपा और आम आदमी पार्टी इन फैक्टरियों में मज़दूरों के हक़-अधिकारों पर कुछ भी न बोले। क्योंकि मज़दूरों की लूट से बवाना के मालिक जो मुनाफा पीटते हैं उससे ही ये भाजपा, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को चन्दा देते हैं। इसलिए ये मज़दूरों की मौत पर चुप ही रहेंगे।
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